अगर किसी की याद आए
और वो साथ न हो,
तो क्या किया जाए?
मन की बातों को मन में दबा दे
या उनकी तस्वीर के सामने उगल दिया जाए
या तनहाई से उफान पर आते
जज़्बातों के सैलाब को भवर में छोड़ दिया जाए
किसीकी बेहद याद आए
और वो साथ न हो, तो क्या किया जाए?
जब उनसे मिलने का जी करे
तो किससे मिलके जी हल्का किया जाए
जब उन्हें गले लगाने की तलब उठे
उस तलब को बेबसी से कैसे ढका जाए
जब किसी की ग़ैरहाजिरी
एकांत में चिल्लाए, तो क्या किया जाए?
जो हर आदत में शामिल था
उस हर आदत को कैसे बदल दिया जाए
खाली खाली से दिन रात को
फिर मसरूफ किस तरह किया जाए
जब किसीके बिना जीवन सोचा न हो
वो जीवन से चला जाए, तो क्या किया जाए?
जब उनकी प्रेरणा से मुस्कान तो आए
और मुस्कान में दर्द छलकता जाए
जब आँखें नम होती रहे
पर आंसू भी थक के हार जाए
जब हर सफलता में
शून्यता का अनुभव हो आए, तो क्या किया जाए?
Sapna...