Monday, March 8, 2021

जीने देना...

 आज उसे नारी दिवस की शुभकामएं देना

और अब से अपने फैसले खुद लेने देना


तुमसे कम ही सही उसे भी पैसे कमाने देना

अपने नाम पे उसे गाडी और घर लेने देना


बेटियों की हंसी पे खिलखिलाते तो हो

बहु की हंसी घूंघट में ना खोने देना


अपने मन को तुम भी आज़ाद होने देना 

उसे चाहत और हुनर के मोती पिरोने देना


उसके कपड़ों पे आलोचना ना होने देना

पायल और चूड़ी को बेडियां ना होने देना


उसे कभी अपने हाथ का बना खाना खिलाना

ज़रूरी नहीं स्वादिष्ट हो पर कोशिश तो करना


बच्चे को खुद संभालकर उसे कुछ देर सोने देना

एकाकी का तोहफा देकर खुद से रूबरू होने देना


भले हो अनजान उसपे जुल्म ना होने देना

चार दीवारें ही दुनिया है ऐसा इल्म ना होने देना


घर की लाक्ष्मी, पराया धन ऐसे खिताब और ना देना

इंसान है वो उसे बस इंसान की तरह जीने देना


Sapna.. 





Saturday, March 6, 2021

साथ ले आना...

आज शाम घर लौटते वक़्त

ज़रा सा सुकून साथ ले आना

और कुछ चीज़ें लिख कर दी है

मेरे हजूर वो साथ ले आना


हुई नहीं है बातें कई दिनों से

मेरे हमराज़ को साथ ले आना

वादा किया था खुश रखने का जिसने

उस हमसफ़र को साथ ले आना


हसी गूंजती नहीं अब घर में

उस मज़ाकिया मिज़ाज को ले आना

गुनगुनाया करते थे मुस्कुराते हुए

उस लुभावने साज़ को ले आना


बैठा रहता है बेटा खिलोने लिए

उसके पापा को साथ ले आना

खुशबुएं गुम सी है आँगन की

ज़िन्दगी की महक को साथ ले आना


ज़िम्मेदारियाँ तो कई है घर में

तुम बेफिकरी को साथ ले आना

जिसके सदके होती जवानी रंगीन

उस आशिकी को साथ ले आना


रास्ते से सिर्फ अपने लिए

थोड़ा सा समय साथ ले आना

आज शाम को घर लौटते वक़्त

ज़रा सा सुकून साथ ले आना...


Sapna...