Thursday, May 6, 2021

फ़िक्र ना करना...

 

निडर होके अपने पंख पसारना

तुम अपने अंदर हौंसलों को भरना

तेरी उड़ान को सहारा मैं दूंगी

तुम ऊंचाई की फ़िक्र ना करना


बेख़ौफ़ होके मन की बात कहना

तुम अपने शब्दों में सादगी भरना

तेरे लव्ज़ों को आवाज़ मैं दूंगी

तुम शोर शराबे की फ़िक्र ना करना


सोच समझ के हमकदम चुनना 

तुम भीड़ से कभी ना डरना

तेरी तन्हाई में हाथ मैं थामूंगी 

तुम अकेलेपन की फ़िक्र ना करना


बालपन के खेल खेलते रहना

तुम चंचलता को बरकरार रखना

तेरे हर बचपने में साथ मैं दूंगी

तुम हार जीत की फ़िक्र ना करना


सच्चाई से हर काम को करना

तुम आगे ही आगे बढ़ते रहना

तेरी कोशिशों को आशीष मैं दूंगी

तुम असफलता की फ़िक्र ना करना


मुस्कराहट को बनाये रखना

तुम आँचल में खुशियां बटोरते रहना

तेरे हर जश्न में रौशनी बनूँगी

तुम मेरे अंधेरों की फ़िक्र ना करना


Sapna... 

Friday, April 9, 2021

ज़रूरी नहीं...

इन दो दिलों का नाता ऐसा

की दूर होकर भी कोई दूरी नहीं

आपके दिल का हाल जानने को

मुझे आपसे मिलना ज़रूरी नहीं


आपकी चमकती आँखें हमें

दिखला देती हर मजबूरी है

आपके दर्द को महसूस करने को

आपका हाथ थामना ज़रूरी नहीं


आपकी आवाज़ कह देती है

जो बातें छूट गई अधूरी है

आपके मन की बेचैनी समझने को

आपके पास होना ज़रूरी नहीं


आपकी खिलती मुस्कराहटों से

मेरा मन हो जाता सिन्दूरी है 

आपकी ख़ुशी की साक्षी बनने को

महफ़िल में शामिल होना ज़रूरी नहीं


बड़बड़ाती हूँ मैं अकेले में 

सब माने ये आदत फितूरी है 

आपसे जी भर के बातें करने को

आपसे बात करना ज़रूरी नहीं


साथ शुरू हुई कहानी हमारी

शायद एक साथ हो पूरी नहीं

आपसे मोहोब्बत करते रहने को

मुझे आपकी इजाज़त ज़रूरी नहीं


Sapna... 


Monday, March 8, 2021

जीने देना...

 आज उसे नारी दिवस की शुभकामएं देना

और अब से अपने फैसले खुद लेने देना


तुमसे कम ही सही उसे भी पैसे कमाने देना

अपने नाम पे उसे गाडी और घर लेने देना


बेटियों की हंसी पे खिलखिलाते तो हो

बहु की हंसी घूंघट में ना खोने देना


अपने मन को तुम भी आज़ाद होने देना 

उसे चाहत और हुनर के मोती पिरोने देना


उसके कपड़ों पे आलोचना ना होने देना

पायल और चूड़ी को बेडियां ना होने देना


उसे कभी अपने हाथ का बना खाना खिलाना

ज़रूरी नहीं स्वादिष्ट हो पर कोशिश तो करना


बच्चे को खुद संभालकर उसे कुछ देर सोने देना

एकाकी का तोहफा देकर खुद से रूबरू होने देना


भले हो अनजान उसपे जुल्म ना होने देना

चार दीवारें ही दुनिया है ऐसा इल्म ना होने देना


घर की लाक्ष्मी, पराया धन ऐसे खिताब और ना देना

इंसान है वो उसे बस इंसान की तरह जीने देना


Sapna.. 





Saturday, March 6, 2021

साथ ले आना...

आज शाम घर लौटते वक़्त

ज़रा सा सुकून साथ ले आना

और कुछ चीज़ें लिख कर दी है

मेरे हजूर वो साथ ले आना


हुई नहीं है बातें कई दिनों से

मेरे हमराज़ को साथ ले आना

वादा किया था खुश रखने का जिसने

उस हमसफ़र को साथ ले आना


हसी गूंजती नहीं अब घर में

उस मज़ाकिया मिज़ाज को ले आना

गुनगुनाया करते थे मुस्कुराते हुए

उस लुभावने साज़ को ले आना


बैठा रहता है बेटा खिलोने लिए

उसके पापा को साथ ले आना

खुशबुएं गुम सी है आँगन की

ज़िन्दगी की महक को साथ ले आना


ज़िम्मेदारियाँ तो कई है घर में

तुम बेफिकरी को साथ ले आना

जिसके सदके होती जवानी रंगीन

उस आशिकी को साथ ले आना


रास्ते से सिर्फ अपने लिए

थोड़ा सा समय साथ ले आना

आज शाम को घर लौटते वक़्त

ज़रा सा सुकून साथ ले आना...


Sapna...