Tuesday, March 31, 2020

तेरी तारीफ में...

ये मुस्कान तेरे होंठों की 
मेरे हर ग़म को भुलाती है
ये धूप तेरी ज़ुल्फ़ों से छन्न के
मेरे दिन को रोशन बनाती है

ये आँखें तेरी चमकती सी
खूबसूरती का आईना दिखाती है
जब खुद पर मुझे संदेह हुआ
ये दिल की सच्चाई बताती है

ये हाथ तेरे कोमल से
मेरी पसंद का खाना बनाते है 
वक़्त जब जब मेरी परीक्षा ले
ये हाथ थामे होंसला बढ़ाते है

ये कदम तेरे मेरी ओर चले
ज़िन्दगी को खुशहाल बनाते है
मौसम चाहे जो भी हो
ये हर राह साथ निभाते है

ये चेहरा तेरा तस्वीर सा
रूह को रंगीन बनाती है
ये होना तेरा पास पास
मेरे होने को साकार बनाती है

क्या लव्ज़ हो तेरी तारीफ में
ये ज़ुबान मेरी कह नहीं पाती है
बस ये जान ले जान मेरी
तेरे बगैर हर पल जान जाती है


Sapna... 

Sunday, March 29, 2020

रह गया...

 हर जज़बात जता कर भी
कुछ अनकहा सा रह गया
पूरी कहानी सुनके भी
कुछ अनसुना सा रह गया

हर ख़ुशी का एहसास होके भी
कुछ ग़म सा अंदर रह गया
हर राज़ से परदा उठकर भी
कोई भेद सा छुपकर रह गया

हर आरज़ू पूरी होके भी
कुछ अधूरा सा रह गया
हर पल मुस्कुरा के भी
कुछ आँसू जैसा बह गया

सब कुछ मुट्ठी में होके भी
कुछ गुमशुदा सा रह गया
हर सुकून महसूस करके भी
एक सैलाब सा अंदर रह गया

सच्ची ख़ुशी की चाह में ही
दिल घाव के दर्द को सह गया
और हर रिश्ता धोखा दे कर भी 
ग़द्दार हमी को कह गया



Sapna.. 

Friday, March 20, 2020

शायद...

शायद तुमसे कभी ये कह ना पाऊ... 

की जब तुम जाने को निकलते हो 
तब तुम्हे रोकने को दिल करता है

जब तुम चुपचाप बैठे रहते हो 
तुम्हारी बातें सुनने को दिल करता है

तकलीफ होती है तुम्हे कोई तो 
उसे खुदपे लेने को दिल करता है

अपनी मुस्कराहट का हर हिस्सा 
तुम्हे देने को दिल करता है

परेशानियाँ घेरे तुम्हे तो तुमसे 
जगह बदलने को दिल करता है

अपने आंसू भूल के तुम्हारी 
ख़ुशी से बहलने को दिल करता है

हँसते हुए नहीं तुम्हे रोते हुए 
देखने को दिल करता है 

अपनी गोद में तुम्हे सोते हुए 
देखने को दिल करता है 

शायद कभी तुमसे ये कह ना पाउ
की तुम हो तो जीने को और 
तुम्हारे बिना ना होने को दिल करता है...


Sapna..