Wednesday, March 29, 2023

चक्रव्यूह..

सवालों का घेरा सा होता है मन के आस पास..

कुछ सवाल ऐसे जिनके जवाब है,

पर वो हमें मान्य नहीं

कुछ सवाल ऐसे जो खुद ही मान्य नहीं

कुछ सवाल जो हम खुदसे पूछा करती हूँ

कुछ सवाल जो सिर्फ आँखें में होते है

कुछ सवालों के कई जवाब होते है

कुछ के जवाब होते ही नहीं

कुछ सवाल ऐसे जिन्हे पूछने से डर लगता है

कुछ सवाल ऐसे जो निडर उमड़ पड़ते है

कुछ सवाल ऐसे जो बासी हो चुके है

कुछ सवाल जो वक़्त में कही खो चुके है

 

ये हाल सिर्फ मेरा नहीं, 

हर एक मन का है...

कुछ सवालों के जवाब तुरंत मिल जाते है

कुछ के लिए ऊपरवाला वक़्त लगाता है

कुछ जवाब आराम देते है

कुछ तकलीफें बढ़ा देते है

कुछ जवाब हमें कैद करते जाते है

कुछ रिहाई की ओरे ले जाते है  

कुछ जवाब सस्ते दामों में बिकते है

कुछ ज़िन्दगी से भी मेहेंगे होते है

कुछ सवालों के जवाब कभी मिलते ही नहीं

कुछ के जवाब हमारे ही अंदर छुपे होते है

वो बस इन सवालों के चक्रव्यूह को तोड़ कर

बाहर आना चाहते है

पर उन्हें नहीं पता की ये उनके बस में नहीं


जिसे जो जब पता चलना होता है

तभी होता है, न पहले, न बाद में

वो एक क्षण में, घेरे में फसे होते है

एक क्षण में आज़ाद हो जाते है

उस क्षण पर गौर करे तो जवाबो का खज़ाना

न करे तो सवालों का चक्रव्यूह...



Sapna..

Thursday, March 9, 2023

आशा और निराशा...

मुझे तुमसे नाराज़ होने का तो हक़ है

पर तुमसे ये आस लगाए रखना की

'तुम मुझे मनाओगे', कुछ हद तक ठीक है

पर 'तुम मुझे समझोगे' 

हर बार, हर परिथिति में,

ये सरासर ज़ुल्म होगा...


शायद जब मैं तुमसे मेरा हाल पूछने की आस लगाए हूँ, 

तुम मुझे मेरे हाल पे छोड़ना चाहते हो.

जब मैं तुमसे बातें सुनना चाहती हूँ,

शायद तुम मुझे अपनी बातों से परेशान नहीं करना चाहते.

जब मैं तुमसे मेरे लिए कुछ वक़्त चाहती हूँ,

तुम शायद मुझे खुदके साथ वक़्त बिताते देखना चाहते हो.

जब मैं तुमसे अपनी ज़िन्दगी, अपने वजूद की एहमियत पूछती हूँ,

शायद तुम मुझे खुद की कीमत महसूस कराना चाहते हो.

जब मैं तुम्हारे लिए सब कुछ करने की जत्तोजेहेत करती हूँ,

तुम शायद मुझे कुछ ना करने का सुकून देना चाहते हो.

जब मैं तुम्हारा इंतज़ार करती हूँ,

तब शायद तुम मेरा इंतज़ार कर रहे होते हो...


इनमे से कई शायद

और ऐसे बहुत से और शायद सच भी है

इन सब परिस्थितियों में हमारा रिश्ता

'आशा और निराशा' के बीच झूल रहा होता है

अनसुनी आशा, अनकही निराशा..


लेकिन

क्या हमारे माता पिता के अलावा

हमारी अनकही कोई सुन सकता है?

किसीके मन का हाल जानना,

उनकी बातें बिन बोले समझना

क्या रिश्तों को भारी नहीं बना देता?


क्या समाज, रीति- रिवाज़ों

और ज़िम्मेदरियों का बोझ काफी नहीं

जो हम अपने रिश्तों पर और बोझ लादना चाहते है?

हम क्यों नहीं अपने मन की बात खुद ही कह देते?

क्यों हम अपने प्यार, अपनी ख़ुशी के लिए

खुद पहल नहीं करते? 

ऐसा तो नहीं की मांगी हुई खुशियां हमारी नहीं होती

बल्कि वो खुशियां और एहम होती है

जिनके लिए हम खुद कोशिश करते है..


तो मैं अब भी तुमसे नाराज़गी जताऊँगी

पर जो तुम मुझे ना मना पाओ,

तो तुम्हे मनाने का नुस्खा भी बता दूंगी

तुम मुझे समझ ना पाओ,

तो समझाने की कोशिश करुँगी

क्यूँकि शायद मैं अब समझ रही हूँ

की ये ज़िन्दगी एक तोहफा है

इसका लुत्फ़ उठाने बस तुम मेरे साथ रहना...


Sapna.. 

Saturday, March 4, 2023

वाह रे ज़िन्दगी!

 वाह रे ज़िन्दगी!

कितनी शानदार है तू,

और कितनी कंजूस भी.

कितनी खुशमिज़ाज है तू,

और कितनी संजीदा भी..


प्यार से कभी किसी को

कुछ सीखाना तो तुझे आया ही नहीं.

पर तेरे थपेड़ो से ऐसी सीख मिली

कि खानेवाला कभी भूल पाया ही नहीं.


मैं भी उन्ही में से तो एक हूँ

जिसके पास सब कुछ रहते

मज़े से ज़िन्दगी जिया करती.

मुझे ये एहसास था की

जो तूने मुझे दिया है, वो कईओ के पास नहीं

कभी तेरे दिए पे ना शक किया,

न तेरे ना देने पे मायूसी जताई.

'जो होता है अच्छे के लिए होता है',

ये समझ के तुझे पलकों पे बिठाये रखा.


पर कहा जानती थी

 कि जिन चीज़ों के लिए शुक्रगुज़ार हूँ,

उसका तो हिसाब तू करती ही नहीं.


तू तो उन अनमोल लोगो पर नज़र गड़ाए बैठी है,

जिनके बिना हम कुछ भी नहीं

और पल भर में

हमारे तिलिस्म के घेरे से छुड़ाकर 

तू उन्हें उड़ा ले जाती है..


जैसे पहले उनके बिना कुछ होता नहीं,

वैसे ही, उनके बाद भी कुछ नहीं होता..


जैसे किसी बच्चे के लिए

उसके बचपन से ज़्यादा मोल

किसी खिलोने का होता है

वैसे ही हम बेवक़ूफ़, ज़िन्दगी से ज़्यादा मोल

साधनो को देने में समय बिता देते है.


और फिर तेरे एक थपेडे से

जैसे नींद जाग जाती है.


वाह रे ज़िन्दगी!

कितना देती है तू,

और कितना छीनती भी.

कितना हँसाती है तू,

और कितना रुलाती भी...


Sapna..