Saturday, February 25, 2023

रूबरू..

मैं रोना चाहती हूँ

नहीं...

पर अब नहीं 

पापा की हिम्मत टूटने नहीं देनी है

दीदी का सहारा भी तो बनना है

कल जी भर के रो लुंगी...


(अगले दिन..)

अरे आज तो सारा परिवार यहाँ है

आज माँ को अलविदा कहना है

भाई और भाभी से माफ़ी मांगनी है

उनको दिया हुआ वादा जो नहीं निभा पाए


अब उनसे नज़रे कैसे मिला पाएंगे

इतना तो कर सकते है

की उनके सामने नही रोयेंगे


(2 दिन बाद..)

रेल गाडी और हवाई जहाज में

अनजान लोग बहुत है

बेवजह सब घूरेंगे

यहाँ नहीं रोना है


(कुछ दिन बाद..)

कुछ दिन यहाँ रुक के, 

ज़िन्दगी को सामान्य करने की कोशिश करेंगे

आज बेटा मिलने आया है

भांजा और भतीजी भी हमें ताकते है

हमारे बच्चे कुतूहल और अचंभे से देखते है

कौन है ये इतने सारे लोग?

क्यों आते है रोज़ घर पे इतने लोग?

इन बच्चों के सामने रोना क्या ठीक होगा?


नहीं नहीं..

मैं घर जाके सिर्फ उनके सामने रोउंगी.. 

वो मेरी बातें सुनेंगे, मुझे सहारा देंगे

मेरी मनोदशा समझेंगे

हाँ...

उनके सामने रोने में क्या हर्ज़?


घर आके उन्हें देखा

पर वो तो ज़िन्दगी की दौड़ में व्यस्त है

उनके काम में दखल कैसे दिया जाए? 

तो तय हुआ की

उनके दफ्तर जाने के बाद रोया जाए...


अकेले में जब खुद से मिली,

रोने की बहुत कोशिश की

ना पलके भीगी, ना आंसू आये, 

शायद आंसू सूख गए होंगे..


दिन भर अपना काम करके

अंत में प्रार्थना करके

बिस्तर पे लेटी,

आँखें बंद की,

माँ को देखा,

और एकाएक आंसुओं की बौछार शुरू हो गई


शायद उन्हें मुझसे एकांत में रूबरू होना था

जब हम दोनों की बातें रोकने वाला कोई ना हो..

उनकी बातें मैं घंटों सुनती रही

और ये आँखें बिना थके रोती रही...


Sapna..

Friday, February 24, 2023

नहीं लगता ..

 आपके बीना आइस क्रीम में ठंडक नहीं

मक्खन खाखरे में स्वाद नहीं

भुट्टे की चटनी तीखी नहीं

चाट में चटकारा नहीं


आपके बिना सिनेमा में मज़ा नहीं

मस्ती में मनोरंजन नहीं

शॉपिंग में ख़ुशी नहीं

गानों में अर्थ नहीं


आपके बिना शादियों में जशन नहीं

लहंगे में खूबसूरती नहीं

चूड़ियों में खनक नहीं

चश्मे में चमक नहीं


आपके बिना दिवाली की रौनक नहीं

नए साल की बधाई नहीं

माताजी का ठंडा नहीं

होली में रंग नहीं


आपके बिना बादाम का दूध नहीं

सर्दिओं की मिठाई नहीं

आम की गुठलियों का मज़ा नहीं

पकोड़ो भी करारे नहीं


आपके बिना बच्चों को लाड नहीं

पापा और हमको डाँट नहीं

भाई के साथ गोद की लड़ाई नहीं

माथे पर सुकून से सेहलाहट नहीं


आपके बिना गर्मी की छुट्टियां नहीं

रिसोर्ट का प्रोग्राम नहीं

रात भर जाग के बातें नहीं

घर पे डांस की पार्टी नहीं


आपके बिना फोटो में यादें नहीं

फ़ोन पर रोज़ के गप्पे नहीं

मिलने का इंतज़ार नहीं

कल की तैयारी नहीं


आपके बिना हम है तो सही

पर आपके बिना हम हम ही नहीं

घर तो वही है मगर

आपके बिना घर, घर ही नहीं..


Sapna..

Wednesday, February 22, 2023

तुम बिन...

तुम बिन जैसे

जड़ बिना वृक्ष

तुम बिन जैसे

वायु बिना सांसें

तुम बिन जैसे

आत्मा बिना शरीर

तुम बिन जैसे

दिशाहीन यात्रा


तुम्हारी कोशिशो के आगे

हमारी कोशिश बेकार लगती है

तुम्हारे मातृत्व के सामने

हमारी ममता असार लगती है


हर एक की, हर चीज़ का ख्याल

कैसे रख लेती थी?

अपने अपनों की खामियां

कितनी खूबसुरति से छुपा लेती थी

दुःख में खुद घिरी होकर भी

हम तक सिर्फ ख़ुशी पहुँचाती

माँ, तुम्हारी अजीब-ओ-गरीब तरक़ीबें

हमें तकलीफ से बचा लेती


सब कहते है, हिम्मत रखो

वक़्त के साथ सब ठीक हो जायेगा

उन नादानो को क्या समझाए

की ये परिवार अब एक सूखा कुआ है

इसमें ममता का मधुर जल

फिर कभी ना भर पायेगा..


ऐसा नहीं की हम प्रयत्न नहीं करते

बस उसमे पूरी जान नहीं लगा पाते

उसका एक हिस्सा तुम्हारे साथ विदा जो हो गया


अब तो आंसू भी इजाज़त नहीं लेते

बेबाक छलक जाते है

वो समझते है की अब

उन्हें बहने से रोकने वाला कौन?


खैर, फिर कही, किसी और जनम में 

आपसे फिर मुलाक़ात हो

ये प्रार्थना सुबह शाम करते है

रात ढली, दिन निकल गया

चलो, अपने अपने काम पर चलते है


Sapna..

Monday, February 13, 2023

दम तोड़ देना...

दम तोड़ देना...

क्या अर्थ होता है इसका?

क्या सच में ऐसा होता भी है?


सारी ज़िन्दगी सबको खुश करके

अपनी अंतिम यात्रा पे

अपनों को रोता हुआ छोड़ जाना

क्या वाक़ेय मुमकिन है?

क्या उस इंसान की

ज़िन्दगी भर की महनत दम तोड़ सकती है?


उस इंसान से कभी दूर रहने के

ख्याल से भी डरने वाले लोग

उन्हें खुद सजा के, आखरी पड़ाव तक ले जाते है

क्या उनका लगाव दम तोड़ सकता है?


चाहे कितने ही लोग फिर मिलने आये

कितनी ही अच्छी बातें कहे

पर उस एक इंसान से बात करने की, 

उसे फिर से ढूंढ लेने की चाह

कभी दम तोड़ सकती है?


जो पल कैद किये हो

तस्वीरों में और मन में

उनके जाने के बाद,

क्या उन यादों की

ख़ुशी दम तोड़ सकती है?


उनके आस पास होने पर

उनके साथ वक़्त बिताने पर

कुछ ख़ास लगता था

क्या वो एहसास दम तोड़ सकता है?


उनके बाद

न ग़म ख़तम होते है,

न खुशियां

तब हमारा हौसला बढ़ाता,

हमे तसल्ली देता

क्या उनका आशीर्वाद दम तोड़ सकता है?


सब कहते है वो दूर से हमे देख रहे है

हमारी हर मुश्किल में वो राह दिखाते है

अंधेरों में रौशनी फैलाते है

पर उनका आकार बदल जाने से

क्या उनका साथ दम तोड़ सकता है?


उम्र बढ़ते बढ़ते

यादें धुंधली होती जाती है

तो क्या भूली बिसरि याद में

उनसे मिलने की तड़प दम तोड़ सकती है?


मेरे ख़याल में..

दम तो टूटता है

उन कोशिशों का,

जो उन्हें अपने पास रखने के लिए की जाती है

उन अनगिनत लम्हो का,

जो उनके साथ बिताये जा सकते थे

उन यादों का,

जो उनके साथ बनाई जा सकती थी..

दम इंसान का नहीं टूटता

बस उसकी एक यात्रा का टूटता है

और वो चल पड़ते है

कही और, किसी और के साथ

एक नई यात्रा पे...


Sapna..


Saturday, February 11, 2023

चमत्कार..

चहचहाती हुई घर में फिरती

उसकी आवाज़ जैसे घर में गूंजती 

कभी बेबाक शरारतें करती

कभी लोगो की नक़ल उतारती

औरों को हँसने का मौका देती

मुश्किलों में वो हौसला बढाती


अब ये आँखों को क्या दिख रहा है

सारा घर यूं शांत सा पड़ा है

यहां क्या कुछ अविश्वसनीय हुआ है?


आज वो चुप सी है

शायद किसीकी याद में

बहुत रो चुकी है


अब वो पाबंदियों से परे है

शायद किसी को खोजते हुए

खुद ही खो चुकी है


अब उसकी आँखों में नींद कहा

शायद किसीकी गोद में

जी भर के सो चुकी है


सब कुछ तो है उसके पास

न जाने किस बात पे ऐंठी है 


बाहर की तरफ जाने वाले दरवाज़ों को

जैसे अंदर से बंद करके बैठी है


अखबार का एक शोक सन्देश पढ़के

खुदको कुछ यकीन दिलाने की

नाकाम कोशिश करती है


बहुत देर तक उसे देखने के बाद

न मान कर, थक हार कर

उससे मुँह मोड़ लेती है


एहसास को न बता सकती है

न दबा सकती है

बस एक चमत्कार की आस में

आसमान की ओर ताकती हुई

इच्छा पूरी होने की प्यास रखती है


Sapna.. 

Tuesday, February 7, 2023

उम्र..

जिन्होंने ज़्यादा ज़िन्दगी जी है,

उन्होंने ज़्यादा मौते भी देखी होंगी

शायद इसीलिए बढ़ती उम्र के साथ

मृत्यु की स्वीकृति बढ़ जाती है


पर मैंने कल्पना भी ना की थी

की मुझे जीवन देने वाले के 

जीवन का अंत मेरी आँखों के सामने होगा

मैं इसके लिए ना तब तैयार थी जब ये हो रहा था

ना मैं अब तैयार हूँ, जब ये हो चुका है!


मुझे उम्र के सफर में आगे नहीं पीछे जाना है

मुझे ना प्रौढ़ता चाहिए, ना जवानी, ना लड़कपन

मुझे अपना बचपन चाहिए


वही जहाँ मैं तुम्हारी गोद में सोया करती थी

वही जहाँ मैं तुम्हारे ध्यान के लिए रोया करती

वही जब तुम्हारे आँचल की छाव मिलती

वही जब मुझे देख तुम्हारी मुस्कान खिलती


अब जो चाहू पा सकती हूँ

पर तुम्हारा निश्छल प्यार कहा मिलेगा

इस चक्र को कोई पलट सके

तो बढ़ती उम्र को चकमा देके 

फिर से ५ बरस की हो जाऊ?...


Sapna..


नाराज़...

 कुछ दिनों से आपसे नाराज़ सी हूँ

पर आपसे बातें फिर भी करती रहती हूँ

धोखेबाज़, जल्दबाज़, खुदगर्ज़

सब कह दिया आपको..


कितना कुछ कहना था आपसे, 

कितना कुछ सुनना भी था

कितना और घूमना-फिरना था,

कितनी यादें बनानी थी


साथ सिनेमा देखने जाना था

नई जगहो पर खाना था

कई सारी तसवीरें खिचवानी थी

किस्से सुनाकर आपको डराना था


पापा के हाथ से आपको

ज़बरदस्ती मिठाई खिलानी थी

बच्चों के चहीते गानों पे

नाचते हुए आपकी वीडियो बनानी थी


अपनी गलतियों के लिए

आपसे डाँट सुननी थी 

वो ही साड़ी बार बार पेहेन ने पर

आपसे लड़ाई भी तो करनी थी 


छोटे बड़े खिशियों के लम्हे

अभी आपके साथ जीने थे

दुःख, दुविधा, सम्रिद्धि, स्वास्थ

ज़िन्दगी के कई रस आपके साथ पीने थे


पर अब धीरे धीरे ये समझ आ रहा है...


की अगर आपके बस में होता

तो आप कभी हमे छोड़के ना जाती

आपके घर में और हम सब में

आपकी जान जो बस्ती थी


मलाल तो कई चीज़ों का रहेगा मगर

अब आपसे नाराज़ रहने को जी नहीं करता

फिर भी ​एक चीज़ के लिए ताउम्र नाराज़ रहूंगी 

की आप हमारे लिए कई सारी चीज़ें छोड़ गई

माँ, आपने वो चीज़ें खुद ही क्यों नहीं इस्तेमाल की?


Sapna...

रंग...

मुझे हर रंग में माँ

तेरे रंग दिखाए देने लगे है


सुबह की धूप सी खिली खिली

तेरे मुस्कान का रंग पीला

हम बच्चों को डाटती फटकारती

गुस्से का तेरा रंग नीला


जब तू लेहेंगा पहन के सजती

तुझपर खिलती ओढ़नी लाल

जब पापा तुझे मिठाई खिलाते

तो शर्म से गुलाबी होते तेरे गाल


तेरे आशीष से फलता-फूलता

हरा - भरा सा तेरा परिवार

हमारे हर गलत को सही करता 

सौम्य - शीतल सफ़ेद सा तेरा दुलार


अपने अंदर इंद्रधनुष का

हर रंग तुम बसाया करती हो

अपने रंगो के पिटारे में से

कुछ अपने अपनों के नाम करती हो


मुझे हर रंग में माँ

तेरे रंग दिखाए देने लगे है

उन सब रंगो को बटोरकर

एक - एक हिस्सा हम अपने पास रखने लगे है..


Sapna...