Friday, April 22, 2022

भाभी..

मैने इस शब्द का एक ही मतलब समझा है

भाभी - भाई भी हो सकती है


हमारे साथ शरारत कर सकती है

छेड़खानी करने पर रूठ सकती है

हमारे राज़ और परेशानी जान सकती है

वो भी कभी हमसे ऊब सकती है


लेकिन... 

अगर हम भाई की तरह उसे डाट सकते है

तो भाई की तरह उसकी ढाल भी बनना पड़ेगा

अगर हम भाई की तरफ उसे ज़िम्मेदारी दे सकते है

तो भाई की तरह उसका बोझ हल्का भी करना पड़ेगा

अगर हम भाई की तरह उससे लड़ सकते है

तो भाई की तरह ही उसपे जान छिडकनी पड़ेगी


भाभी आई तो किसी और घर से है

पर अब ये घर भी उसका है

ये हमें उसे बताना पड़ेगा

हमारे माता पिता की सीख से

वो घर को हमसे बेहतर संभाल सकती है

ये विश्वास हमें जाताना पड़ेगा


जैसे भाई पापा की परंपरा आगे बढ़ाते है

भाभी ना हो तो माँ की परंपरा आगे कौन बढ़ायेगा?

जैसे पापा की वसीयत में सब भाई के नाम होता है

वैसे भाभी ना हो तो माँ का सब कुछ किसके नाम हो पायेगा?


मुझे तो ऐसे ही सवाल पूछने की आदत है

तो भाभी..

गलतियां करके उनसे सीखने की 

आपको इज़ाज़त है

रिश्तों में मीठास बनाये रखना

ये आपसे इनायत है

और सबसे ज़रूरी 

अपने नए घर में तुम्हारा

बहुत बहुत स्वागत है.... 

Saturday, April 9, 2022

आंसू...

 क्या याद है तुम्हे

तुमने मुझसे कहा था

की मेरे आंसू नहीं देख सकते तुम?


उस बात को बहुत वक़्त बीत गया

पर यकीन करो मेरा

मैं जब भी रोती हूँ

सबसे पहले तुम्हे याद करती हूँ


तब, जब घर से हुई पराई

तब, जब मैंने बेवजह डांट खाई

तब, जब दोस्तों की याद हुई

तब, जब मैंने खुश कबरी पाई

तब, जब रातों को नींद नहीं आई

तब, जब एक नन्ही जान को दुनिया में लाई

तब, जब अपने बारे में बकवास सुनी

तब, जब मैं मन का कर ना पाई


लेकिन जानते हो? 

अब मैं रोती नहीं

इसलिए क्यों की इन तमान मौको पे

तुम मेरे साथ ही थे

खामोश, मेरे आंसू देखते रहे...


Sapna...

स्वर्ग बनाये...

सज धज के बैंड बाजे लेके

घर किसी और के आके  

हाथ जोड़के हम अपनी

घर की लक्ष्मी ले जाते 


उसका पहनावा बदलते

रहने सहने का ढंग बदलते

ज़ोर ज़ोर से हम हस्ते

क्यों वो धीमी आवाज़ में मुस्काये? 


बेटी को हम आज़ाद बनाते

बहू को घूँघट में गुड़िया बनाते

बेटों को आत्मा निर्भर बनके

क्यों बहू को घर में ताला लगते? 


वो भी तो हम जैसी है

ये ही हम भूल जाते

ससुराल की नाक वो ऊंची रखे

तो हम उसे क्यों नीचे दिखते?


अपनी ज़िन्दगी को लेके

उसके भी कुछ अरमान है

चूल्हे बच्चों और घर के परे

क्या उसकी कोई पहचान नहीं? 


बेशक वो बेटी है पराई

अपनों को वो छोड़ के आई

अपनी इज़्ज़त की आड़ में

उसकी खुशियां क्यों जाए? 


रहने दे उसे जैसी वो है

उसका भी मान बढ़ाए

बहू और बेटी के अलग रंगो से

क्यों ना आँगन रंगीन बनाए? 


वक़्त है अब बदलने का

बहुओं के ढंग में ढलने का

हम जैसे बनके वो बूढी ना हो

क्यों ना हम उन जैसे जवान हो जाए?


आज हम सब नाचते गाते

नए सदस्य को लेके जाए

उसे खुशियों की कमी ना हो

क्यों ना उसके लिए घर स्वर्ग बनाये??


Sapna...

Thursday, April 7, 2022

एक बात कहनी है तुमसे...

पास आकर बैठो ज़रा

एक बात केहनी है तुमसे

रूठोगे तो नहीं? वादा करो... 

कुछ एक बातों का खुलासा करना है


जानते हो? जब तुमसे पहली बार मिली

दोस्ती होगी, ये नहीं सोचा था

औरो की तरह तुम भी हो

ये सोचकर तुम्हे अनदेखा कर दिया


ना जाने वो कौनसा पल था जब

कुछ सच्चे, कुछ अच्छे लगने लगे

दिखावे से भरी दुनिया में तुम

बिना बनावट, साफ़ दिल के बच्चे लगे


जब भी तुमसे बातें होती

दिल खोल के रखने को जी चाहता

एक बात कभी तुम्हे बताई नहीं

उस बात के लिए मुझे माफ़ करना


जब सब हमें देखके बातें बनाते

तुम हंसी में सबको टाल देते

तुम्हारे दिल में क्या था पता नहीं,

मेरे मन में कोई और बसा था...


तुमने कभी करीबी जताई नहीं

कभी बदले में कुछ माँगा भी नहीं

बस मेरी बेहिसाब बक बक सुनते रहे

और में नाबाद तुम्हे सुनाती रही


पर जब दिल टूटा मेरा,

तुमने मुझे सहारा क्यों नहीं दिया?

दोस्तों को भूलने की सजा मिली है

ये कहकर क्यों और दिल दुखा दिया?


एक बात कहनी है तुमसे

क्या पहले की तरह सुनोगे

एक दोस्त की बहुत याद आती है

क्या मेरे लिए तुम उसे मना लोगे??


Sapna...