आज कल तेरी याद इतनी क्यों आती है?
वक़्त बेवक़्त इस क़द्र क्यों सताती है?
ख्याल तेरा है ज़हन में अब भी
बातें करती हूँ मैं तुझसे अब भी
फिर भी तेरे ज़िक्र से
आँख क्यों छलक जाती है?
आज कल तेरी याद इतनी क्यों आती है?
तेरे चेहरे का नूर नयनो में है अब भी
तेरी मुस्कान की छाप दिल पे है अब भी
फिर भी तेरी हर तस्वीर
दिल को चूर - चूर कर जाती है है
आज कल तेरी याद इतनी क्यों आती है?
तेरा परिवार साथ है अब भी
एक दुसरे की ढाल है अब भी
फिर भी कोई न कोई घटना
तेरी कमी का एहसास दिलाती हैं
आज कल तेरी याद इतनी क्यों आती है?
सीख रखी होती तेरी सर आँखों पर
इच्छा रखी होती तेरी अपने ख्वाबों पर
तो शायद इस मलाल में
ज़िन्दगी न गुजरने पाती
तो शायद तेरी याद माँ,
इस तरह न तड़पाती...
Sapna..