जहान की भीड़ से
कुछ पल हो जाए परे
मैं और तुम से हम बने
आ.. चल घर चले
राज़-ऐ-दिल कहने से
दोनों में न कोई डरे
दूरी से भी प्यार बढे
आ.. दोनों बेबाक लडे
दिल खोल के नाचे
कभी जी भर के रोए
बेसुरे बेख़ौफ़ गाते रहे
आ.. हसी के बुलबुले बने
ना कोई परखती नज़रें
ना घुटे रिवाज़ों तले
जज़्बातों का दरिया बना
आ.. ज़रा गोते लगा ले
बाल सफ़ेद हो भले
हाथों की झुर्रियां बढे
फिर ज़िन्दगी मिले ना मिले
ये उम्र मेरी तेरे साथ ढले
आ.. चल अपने घर चले...
कुछ पल हो जाए परे
मैं और तुम से हम बने
आ.. चल घर चले
राज़-ऐ-दिल कहने से
दोनों में न कोई डरे
दूरी से भी प्यार बढे
आ.. दोनों बेबाक लडे
दिल खोल के नाचे
कभी जी भर के रोए
बेसुरे बेख़ौफ़ गाते रहे
आ.. हसी के बुलबुले बने
ना कोई परखती नज़रें
ना घुटे रिवाज़ों तले
जज़्बातों का दरिया बना
आ.. ज़रा गोते लगा ले
बाल सफ़ेद हो भले
हाथों की झुर्रियां बढे
फिर ज़िन्दगी मिले ना मिले
ये उम्र मेरी तेरे साथ ढले
आ.. चल अपने घर चले...
Sapna...
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