Thursday, April 20, 2023

राह दिखाओ...

 आप सोचती होंगी,

कि बड़ी खुदगर्ज़ हो गई हूँ.

मैं आज कल

आपकी तस्वीर से ही बातें करती हूँ,

और चाहती हूँ

की आप सिर्फ सुने नहीं,

जवाब भी दे.

बड़ी बेशरम भी हो गई हूँ शायद

जो कुदरत के किए को

चुनौती देने चली हूँ..


पर मैं करू भी क्या माँ..?

कुछ शूल इतने ज़्यादा चुभ रहे है

कि उनका मरहम

शायद सिर्फ आपके पास है,

या आपके पास था...


कहते है सब,

कि दिल से कोशिश करेंगे तो

आपको महसूस कर सकेंगे

मैं नहीं जानती ये कैसे होगा,

बस चाहती हूँ को अब हो जाए..


क्यूँकी मैं आपसे अपने सवालों का

जवाब नहीं चाहती.

मैं आपके ज़रिए, आज़ादी चाहती हूँ

इन बेरुखियों से, इस व्यवहार से

इस जड़ता से, इस हृदयहीनता से

और इस कभी ना ख़तम होने वाली घुटन से..


मैं नही जानती

कि इन सब से नवाज़े जाने के लिए

मैंने क्या कर दिया है.

पर आपकी सीख पे कभी आंच तो नहीं आने दी.

ना कभी किसीका बुरा चाहा, ना किया

अपने से आगे हमेशा दूसरो को रखा


पर माँ.. आपने मुझे ये क्यों नहीं समझा दिया

कि ये सब सिर्फ उनके लिए करना चाहिए

जो इसके हक़दार हो.

जिन्हे अपनेपन और प्यार के मायने

समझ ही नहीं आते,

उन जड़बुद्धियो के लिए नहीं..


जो हमें हमारे हक़ का मान न दे पाए,

उन्हें हम सर पर क्यों बिठाये रखे?

जिनके लिए हम उनकी दुनिया का हिस्सा भी नहीं,

उन्हें हम अपना सब कुछ कैसे मानते चले??


अब तक सिर्फ आपकी हस्ती तस्वीर देखके

मैंने बहुत हिम्मत बटोर तो ली है,

पर अब शायद उसका भंडार भी

क्षीण होता सा मालूम होता है.

तो इससे पहले कि ये घुटन

मेरी सीख का दम घोट दे,

मुझे राह दिखाओ माँ....


आपकी प्यारी 

Sapna..

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