आज उसे नारी दिवस की शुभकामएं देना
और अब से अपने फैसले खुद लेने देना
तुमसे कम ही सही उसे भी पैसे कमाने देना
अपने नाम पे उसे गाडी और घर लेने देना
बेटियों की हंसी पे खिलखिलाते तो हो
बहु की हंसी घूंघट में ना खोने देना
अपने मन को तुम भी आज़ाद होने देना
उसे चाहत और हुनर के मोती पिरोने देना
उसके कपड़ों पे आलोचना ना होने देना
पायल और चूड़ी को बेडियां ना होने देना
उसे कभी अपने हाथ का बना खाना खिलाना
ज़रूरी नहीं स्वादिष्ट हो पर कोशिश तो करना
बच्चे को खुद संभालकर उसे कुछ देर सोने देना
एकाकी का तोहफा देकर खुद से रूबरू होने देना
भले हो अनजान उसपे जुल्म ना होने देना
चार दीवारें ही दुनिया है ऐसा इल्म ना होने देना
घर की लाक्ष्मी, पराया धन ऐसे खिताब और ना देना
इंसान है वो उसे बस इंसान की तरह जीने देना
Sapna..
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