आज शाम घर लौटते वक़्त
ज़रा सा सुकून साथ ले आना
और कुछ चीज़ें लिख कर दी है
मेरे हजूर वो साथ ले आना
हुई नहीं है बातें कई दिनों से
मेरे हमराज़ को साथ ले आना
वादा किया था खुश रखने का जिसने
उस हमसफ़र को साथ ले आना
हसी गूंजती नहीं अब घर में
उस मज़ाकिया मिज़ाज को ले आना
गुनगुनाया करते थे मुस्कुराते हुए
उस लुभावने साज़ को ले आना
बैठा रहता है बेटा खिलोने लिए
उसके पापा को साथ ले आना
खुशबुएं गुम सी है आँगन की
ज़िन्दगी की महक को साथ ले आना
ज़िम्मेदारियाँ तो कई है घर में
तुम बेफिकरी को साथ ले आना
जिसके सदके होती जवानी रंगीन
उस आशिकी को साथ ले आना
रास्ते से सिर्फ अपने लिए
थोड़ा सा समय साथ ले आना
आज शाम को घर लौटते वक़्त
ज़रा सा सुकून साथ ले आना...
Sapna...
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