Friday, February 2, 2024

मेरे सफ़ेद बाल...

कई दिनों से दिल में है ये खयाल

कि रंगवालु अपने नए नए सफ़ेद बाल


जब जब आईने में खुदको देखा

तो खुदको जैसे औरों की नज़रों से देखा


की अभी तो तुम जवान हो

फिर सर पे ये सफ़ेद बालों का क्या काम?

बूढी, आंटी, माजिया, बुजुर्ग

ना जाने दिया जाएगा मुझे कौनसा नाम!


तुम हमसे छोटी हो, हम से कुछ सीखो

बाल रंगवालो और हम जैसे tip-top दिखो

कानों में ये आवाज़ें जैसे गूँजने लगी

क्या करू कुछ समझ आया नहीं


दिल कहता की ऐसी ही रह जाऊ

दिमाग कहता की मैं टिपण्णी ना सुन पाऊ


फिर जब नज़र अपनी ही आँखों पे पड़ी

उनमे देखि मैंने खुदकी दमकती हुई छवि

वो नज़रें मुझे कुछ बताने लगी

अपनी ही एहमियत जताने लगी


तुम्हारे ये जो सफ़ेद बाल है

वो महज़ उम्र बढ़ने की निशानी है

ना इनसे तुम्हारा वजूद बदलेगा, ना व्यवहार

ना इनसे तुम्हारा हुनर घटेगा, ना अपनों का प्यार

फिर क्यों सहना बेवजह अपेक्षाओं का भार?

आलोचनायें तो होती ही है अपार..


बचपन से बस बढ़ना ही तो कायम है 

अब कहाँ तुम्हारी त्वचा वैसी मुलायम है?

कद बढ़ा तब तो किसीने शिकायत ना की

रूप में भी तो तुम सुन्दर होती गई

जूतों को लेके भी तो होता है बवाल

10 नंबर के ढूंढने में हो जाता है बुरा हाल ...


अब चमकने लगे है उम्र से ये बाल

तो इन्हे अपनाने में इतने सारे सवाल?

ये शंकाएं तुम्हारी नहीं, विज्ञापको की दी है

ऐसे ही तो बढ़ती उनको बिक्री है...

ठीक है रंगवालो इन्हे काले, लाल या भूरे

कुछ दिनों में फिर ऐसे ही दिखेंगे पूरे


मेरी मानों जैसी हो, वैसी ही रह जाओ

पैसे बचाओ, बालों का कुदरती सत्त्व भी

बिना शर्त खुद से प्रेम कर पाओ

यही तो है जीने का सही तत्त्व भी..


आँखों की बातें सुनके, आया ये ख़याल

ख़ामख़ा क्यों मिलाऊ मैं दुनिया ताल से ताल 

जिसको जैसे करने है, करे वैसे सवाल

अब नहीं रंगवाउंगी मैं अपने सफ़ेद बाल!!


Sapna..

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