Saturday, February 29, 2020

मैं सोई...

अजीब सी तड़पन साँसों में
तमन्ना हो जैसे अधूरी सी कोई 
जाने किस की राह देखे
पलके मेरी रात भर रोई 

दिलासा दिया तस्वीर दिखा के
मन में जो थी बरसो संजोई
रिश्तों को निभाने हमने 
अपनी ही एहमियत खोई

ज़िन्दगी का बुखार सा था
लापरवाही में चिंता भिगोई
ख़ामोशी की गोली लेके  
सपनो में नींद डुबोई

 यादों को मोती बनाके
दिल ने थी खुशियां पिरोई 
हकीकत कड़वी सी लगे
अब धुंध में मैं खोई 

ले जा रहे थे मुझे कहाँ 
रोकने ना आया कोई
बाहर इतना शोर था फिर भी
सुकून की नींद मैं सोई

Sapna... 

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