शायद तुमसे कभी ये कह ना पाऊ...
की जब तुम जाने को निकलते हो
तब तुम्हे रोकने को दिल करता है
तब तुम्हे रोकने को दिल करता है
जब तुम चुपचाप बैठे रहते हो
तुम्हारी बातें सुनने को दिल करता है
तुम्हारी बातें सुनने को दिल करता है
तकलीफ होती है तुम्हे कोई तो
उसे खुदपे लेने को दिल करता है
उसे खुदपे लेने को दिल करता है
अपनी मुस्कराहट का हर हिस्सा
तुम्हे देने को दिल करता है
तुम्हे देने को दिल करता है
परेशानियाँ घेरे तुम्हे तो तुमसे
जगह बदलने को दिल करता है
जगह बदलने को दिल करता है
अपने आंसू भूल के तुम्हारी
ख़ुशी से बहलने को दिल करता है
ख़ुशी से बहलने को दिल करता है
हँसते हुए नहीं तुम्हे रोते हुए
देखने को दिल करता है
देखने को दिल करता है
अपनी गोद में तुम्हे सोते हुए
देखने को दिल करता है
देखने को दिल करता है
शायद कभी तुमसे ये कह ना पाउ
की तुम हो तो जीने को और
तुम्हारे बिना ना होने को दिल करता है...
तुम्हारे बिना ना होने को दिल करता है...
Sapna..
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