फिर से उस दौर से गुज़र के
कुछ हसीं लम्हे जिया करते है
उन दिनों को याद करके
आज भी मुस्कुरा दिया करते है
जब चुपके दोस्तों की आड़ में
हम आपको देखा करते थे
खिड़की पे खड़े रहके आपकी
एक झलक का इंतज़ार करते थे
सामने आकर दूर चले जाते
उनके बारे में सोचके शर्माते
नज़रें मिल जाती गलती से
अपनेआप ही लैब मुस्काते थे
जहां सब उनसे गले मिलते
हम हाथ पकड़ने को तरसते
औरों से घंटों तक बातें होती
आपकी आवाज़ सुनने को तड़पते
एक अलग ही एहसास था
कुछ अजीब सी खुमारी थी
जब दो दिल साथ हुए थे
उस लड़कपन के प्यार में
Sapna..
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