Monday, April 10, 2023

मेरा पुराना घर...

4 मंज़िलों पर बड़ी सी छत

उस घर में अपना बचपन देखा है

4 परिवार वहाँ मिलकर रहते

उसमे 4 भाइयों की मेहनत को देखा है


19 भाई बहन थे हम

16 साल के अंतराल में

झगड़ते, लड़ते, ख़ुशी मनाते

उस घर ने हमे हर हाल में देखा है


ऊपर निचे खिड़कियों से

ज़ोर ज़ोर से बातें होते देखा है

बनी नई dish का कोई मिठाई

हर एक के घर में पहुंचते देखा है


बारिश के दिनों में छत भर जाता

बहनो को सीढ़ियों से पानी ढकेलते देखा है

अँधेरी, बिन रौशनी की रातों में

अंताक्षरी का खेल होते देखा है


पढ़ाने आते जब मास्टर जी

बेचारे उनकी ही नहीं चलती

कभी मेज की जगह बालटी

कभी बत्ती होती गुल

जन्मदिन पर छुट्टी लेने

उन्हें गुलाब जामुन खिलाते देखा है


क्रिकेट भाइयों का खेल

बहनें को गप्पों में चुस्त देखा

एक दुसरे के कई कई राज़

बड़ों से गुप्त रखते देखा है


होली पे सब साथ ही रंगते

दिवाली में दिए जलाते

छत्तों पर मिलकर पतंग उड़ाते

नया साल ज़ोरों से मनाते देखा है


त्योहारों, अवसरों की तैयारी

माएँ हमारी रसोई में करती

कौन क्या पेहेनने वाला है

लड़कियों को बातें करते देखा है


छुट्टियों में घर जैसे गूंजता था

नए नए खेलों की होती खोज

शरारतों से भरी मस्ती में भी

माँ बाप की इज़्ज़त करते देखा है


लट्टू, कंचे मिलकर खेले

भाड़े पे लाई साइकिल की ख़ुशी

4 आने 8 आने की गोलियों पे

सबका जी ललचाते देखा है


बहार जाने की अनुमति के लिए

एक दुसरे का नाम लिया करते

देर से आके, डाँट से बचने

छुप छुप के, जूते हाथों में लाते देखा है


भाइयों में जैसे दोस्त मिले

बहनो में सहेली और हमराज़

एक दुसरे के साथ से ही

हर काम को पूरे होते देखा है


एक दुसरे के अजीब नाम रखते

बड़ो को हमें परखते देखा है

नए नए रिश्तो की उमंगो में

पुराने रिश्तों को निखारते देखा है   


शादियों की तो धूम अलग थी

खाने का मेनू बनता कही

कही कपड़ो की shopping होती

कही तोहफों की packing होती

संगीत की practise करते करते

नई ज़िन्दगी के सपनो को बुनते देखा है


नई भाभी का प्यार मिला

जीजू के साथ पहली होली

नन्हे मुन्नों को लाड लडाना

उनकी बोली दिल को लुभाते देखा है


बेटियों की बिदाई होते

नई बहुओं को घर आते

बेटे होने लगे पैरों पर खड़े

नई पीढ़ी को होशियार होते देखा है


घर बदले, गाड़ियां बदली

पर उस घर में मैंने अब भी अपनापन देखा है

हर याद को संजोए रखा है

मेरे पुराने घर ने मेरे साथ

एक ज़माना गुज़रते देखा है


Sapna..

6 comments:

  1. बहुत ही खूबसूरत मन छूते शब्दों में पिरोई यादों की तस्वीर..🙏🙏

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद

      Delete