मैने इस शब्द का एक ही मतलब समझा है
भाभी - भाई भी हो सकती है
हमारे साथ शरारत कर सकती है
छेड़खानी करने पर रूठ सकती है
हमारे राज़ और परेशानी जान सकती है
वो भी कभी हमसे ऊब सकती है
लेकिन...
अगर हम भाई की तरह उसे डाट सकते है
तो भाई की तरह उसकी ढाल भी बनना पड़ेगा
अगर हम भाई की तरफ उसे ज़िम्मेदारी दे सकते है
तो भाई की तरह उसका बोझ हल्का भी करना पड़ेगा
अगर हम भाई की तरह उससे लड़ सकते है
तो भाई की तरह ही उसपे जान छिडकनी पड़ेगी
भाभी आई तो किसी और घर से है
पर अब ये घर भी उसका है
ये हमें उसे बताना पड़ेगा
हमारे माता पिता की सीख से
वो घर को हमसे बेहतर संभाल सकती है
ये विश्वास हमें जाताना पड़ेगा
जैसे भाई पापा की परंपरा आगे बढ़ाते है
भाभी ना हो तो माँ की परंपरा आगे कौन बढ़ायेगा?
जैसे पापा की वसीयत में सब भाई के नाम होता है
वैसे भाभी ना हो तो माँ का सब कुछ किसके नाम हो पायेगा?
मुझे तो ऐसे ही सवाल पूछने की आदत है
तो भाभी..
गलतियां करके उनसे सीखने की
आपको इज़ाज़त है
रिश्तों में मीठास बनाये रखना
ये आपसे इनायत है
और सबसे ज़रूरी
अपने नए घर में तुम्हारा
बहुत बहुत स्वागत है....
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