पास आकर बैठो ज़रा
एक बात केहनी है तुमसे
रूठोगे तो नहीं? वादा करो...
कुछ एक बातों का खुलासा करना है
जानते हो? जब तुमसे पहली बार मिली
दोस्ती होगी, ये नहीं सोचा था
औरो की तरह तुम भी हो
ये सोचकर तुम्हे अनदेखा कर दिया
ना जाने वो कौनसा पल था जब
कुछ सच्चे, कुछ अच्छे लगने लगे
दिखावे से भरी दुनिया में तुम
बिना बनावट, साफ़ दिल के बच्चे लगे
जब भी तुमसे बातें होती
दिल खोल के रखने को जी चाहता
एक बात कभी तुम्हे बताई नहीं
उस बात के लिए मुझे माफ़ करना
जब सब हमें देखके बातें बनाते
तुम हंसी में सबको टाल देते
तुम्हारे दिल में क्या था पता नहीं,
मेरे मन में कोई और बसा था...
तुमने कभी करीबी जताई नहीं
कभी बदले में कुछ माँगा भी नहीं
बस मेरी बेहिसाब बक बक सुनते रहे
और में नाबाद तुम्हे सुनाती रही
पर जब दिल टूटा मेरा,
तुमने मुझे सहारा क्यों नहीं दिया?
दोस्तों को भूलने की सजा मिली है
ये कहकर क्यों और दिल दुखा दिया?
एक बात कहनी है तुमसे
क्या पहले की तरह सुनोगे
एक दोस्त की बहुत याद आती है
क्या मेरे लिए तुम उसे मना लोगे??
Sapna...
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