वह उसे दिखाता नहीं
वह ज़्यादा जताती नहीं
मगर वह उसके आंसुओं से
नफरत करता है
और वह उसकी हर परेशानी को
अपना मानती है
वह चुपके से उसकी
खुशी की कोशिश में लगा रेहता
है
और वह उसके सुख में
खुदकों ढालती रहती है
दुनिया के सामने वह
अपने जज़्बात कहता नहीं
लोगों के आगे वह
उसे छेड़ने से थकती नहीं
वह सिर्फ नज़रों से
उसकी तारीफ करता है
और वह बिन बोले
उसकी पसंद का खयाल रखती है
वह कभी उसे
दायरे में नहीं रखता
और वह अपने इश्क़ को
उसके लिए छुपाए रखती है
प्रेम तो दोनों ही करते है मगर
सत्या तो यह है
की हर रिश्ते में,
कोई एक
दूसरे को ज़्यादा चाहता है..
Sapna..
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