Wednesday, June 12, 2024

तुमसे करती थी जो बातें..

 तुमसे करती थी जो बातें

अब तुम्हारी तस्वीर से कर लेती हूँ


रह गई जो अनकही सारी

कविताओं में लिख लेती हूँ


तुमसे मिलने का मन जब हो

सपनो में मिल लेती हूँ


तेरे साथ यादे बनाना

अब ख़यालों में कर लेती हूँ


तुम्हारे आशीर्वाद की गूँज

अपनी प्रार्थना में सुन लेती हूँ


तुम्हारे छुपे हुए राज़ थोड़े

पापा से जान लेती हूँ


तुम्हारे जीने की एक झलक

तुम्हारी पोती में देख लेती हूँ


तुम्हारी फ़िक्र करने की आदत

दीदी में महसूस कर लेती हूँ


तुम्हारे स्नेह के दरिया का स्रोत

भाभी के अपनेपन में पा लेती हूँ


तुम्हारी दरियादिली के किस्से

भाई के ज़रिए जी लेती हूँ


उदास अँधेरे पलों में हिम्मत

तुम्हारी मुस्कान से ले लेती हूँ


तुम्हे गले लगाने का जी करे

तो तुम्हारी साड़ी पहन लेती हूँ 

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