आज ज़रा देर से जगते है
आँखों के प्यालों में नींद भरते है
चलो कुछ नहीं करते है
आज फासलों को दूर रखते है
एक दुसरे की आँखों में तकते है
चलो कुछ नहीं करते है
आज शब्दों को आराम देते है
ख़ामोशी के स्वाद को चखते है
चलो कुछ नहीं करते है
आज यादों में घूमने निकलते है
परेशानियों को खूंटी पे रखते है
चलो कुछ नहीं करते है
सबके लिए रोज़ ही जीते है
आज खुद को आगे रखते है
चलो कुछ नहीं करते है
Sapna..
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