Saturday, January 21, 2023

कमी, गुस्सा और पछतावा...

 माँ, 

तू क्या गई,

अपनी कमी के साथ गुस्सा और पछतावा दे गई


पछतावा इस बात का की तूने बचपन में मुझे खुदसे अलग क्यों किया 

पछतावा इस बात का की कई साल मैंने तुझे माँ क्यों ना बुलाया


पछतावा ये की तेरे बुलाने पे मैं तेरे पास क्यों ना रुकी

पछतावा ये की तेरी हो कर भी मैं तेरी बेटी ना हो सकी


पछतावा इस बात का की तूने मेरा बचपन जिया ही नहीं

रूठना- मानना ये हम दोनों ने कभी किया ही नहीं


पछतावा ये की मैं बेटी क्यों बनी

ससुराल आकर तुझसे फिर से अलग क्यों हुई


पछतावा ये तुझे और क्यों ना घुमाया

तेरी ज़िंदादिली देखने का लुत्फ़ क्यों ना उठाया 


गुस्सा इस बात का की हमने लापरवाही क्यों की

गुस्सा इस बात का की तुझे और वक़्त मिला क्यों नहीं...


गुस्सा इस बात का की कुदरत ने हमें इशारा क्यों ना दिया? 

गुस्सा इस बात का की तूने अपने ही परिवार को दुखी कैसे छोड़ दिया?


तब तेरी कमी लगती थी तो फ़ोन पे बात हुआ करती थी

अब तेरी कमी जैसे किश्तों में जान लिया करती है


ये कमी, ये गुस्सा, ये तकलीफ, ये पछतावा

अब बचा क्या हमारे पास इसके अलावा?


माँ,

कैसे जिया जाए तेरे बिन ये भी सिखा देती

ताकि तेरे बाद जीने में कुछ मदद ही मिल जाती...



Sapna... 

No comments:

Post a Comment