25 जनवरी
ये तारीख अब कुछ अच्छी नहीं लगती
कल सारी रात करवटो में बीती
दिल चाहता था की कल हो ही ना
या फिर जब सुबह आँख खुले
तो 25 नहीं 26 तारीख हो
हर साल इस दिन के लिए इंतज़ार होता
एक एक दिन नज़दीक आने का उत्साह होता
एक उम्मीद सी लहर होती
ढेर सारे प्यार की आशा होती
आज प्यार बरसानेवाला परिवार होते हुए भी
इन आँखों में ना सूखने वाली नमी है
क्युकी गुज़रे सालों की जगह आनेवाले सालों में
अब से हमेशा के लिए, तेरी बधाई की कमी है
खिलखिला कर ख़ुशी से तेरा फ़ोन करना,
'हैप्पी बर्थडे सा' के साथ ढेर सारा आशीष देना,
जमाई सा कहा ले जाएंगे? ये खबर लेना,
क्या तोहफा चाहिए? ये पूछते जाना,
और दिन ख़तम होने से पहले घर आने की बात मनवाना
अब तेरी तरह ज़िद्द कौन किया करेगा?
कौन हमारे लिए जग से लड़ेगा?
कौन हमारी अटूट ढाल बनेगा?
कौन छोटी-छोटी खुशियों में जियेगा?
कौन हमारे बच्चों को लाड से बिगाड़ेगा?
कौन हुमारे सवालों के जवाब देगा?
कौन अब इस खलीपन को भरेगा?...
तो बस अब जी चाहता है
की 25 जनवरी ना आया करे
आंसुओं में भीगी तेरी याद ना दिलाया करे..
अब मन की आस है कि
तेरी मुस्कराहट से हमें हिम्मत मिलती रहे,
तेरी तस्वीर तेरे होने का एहसास दिलाया करे...
Sapna..
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