Saturday, February 11, 2023

चमत्कार..

चहचहाती हुई घर में फिरती

उसकी आवाज़ जैसे घर में गूंजती 

कभी बेबाक शरारतें करती

कभी लोगो की नक़ल उतारती

औरों को हँसने का मौका देती

मुश्किलों में वो हौसला बढाती


अब ये आँखों को क्या दिख रहा है

सारा घर यूं शांत सा पड़ा है

यहां क्या कुछ अविश्वसनीय हुआ है?


आज वो चुप सी है

शायद किसीकी याद में

बहुत रो चुकी है


अब वो पाबंदियों से परे है

शायद किसी को खोजते हुए

खुद ही खो चुकी है


अब उसकी आँखों में नींद कहा

शायद किसीकी गोद में

जी भर के सो चुकी है


सब कुछ तो है उसके पास

न जाने किस बात पे ऐंठी है 


बाहर की तरफ जाने वाले दरवाज़ों को

जैसे अंदर से बंद करके बैठी है


अखबार का एक शोक सन्देश पढ़के

खुदको कुछ यकीन दिलाने की

नाकाम कोशिश करती है


बहुत देर तक उसे देखने के बाद

न मान कर, थक हार कर

उससे मुँह मोड़ लेती है


एहसास को न बता सकती है

न दबा सकती है

बस एक चमत्कार की आस में

आसमान की ओर ताकती हुई

इच्छा पूरी होने की प्यास रखती है


Sapna.. 

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