Tuesday, February 7, 2023

नाराज़...

 कुछ दिनों से आपसे नाराज़ सी हूँ

पर आपसे बातें फिर भी करती रहती हूँ

धोखेबाज़, जल्दबाज़, खुदगर्ज़

सब कह दिया आपको..


कितना कुछ कहना था आपसे, 

कितना कुछ सुनना भी था

कितना और घूमना-फिरना था,

कितनी यादें बनानी थी


साथ सिनेमा देखने जाना था

नई जगहो पर खाना था

कई सारी तसवीरें खिचवानी थी

किस्से सुनाकर आपको डराना था


पापा के हाथ से आपको

ज़बरदस्ती मिठाई खिलानी थी

बच्चों के चहीते गानों पे

नाचते हुए आपकी वीडियो बनानी थी


अपनी गलतियों के लिए

आपसे डाँट सुननी थी 

वो ही साड़ी बार बार पेहेन ने पर

आपसे लड़ाई भी तो करनी थी 


छोटे बड़े खिशियों के लम्हे

अभी आपके साथ जीने थे

दुःख, दुविधा, सम्रिद्धि, स्वास्थ

ज़िन्दगी के कई रस आपके साथ पीने थे


पर अब धीरे धीरे ये समझ आ रहा है...


की अगर आपके बस में होता

तो आप कभी हमे छोड़के ना जाती

आपके घर में और हम सब में

आपकी जान जो बस्ती थी


मलाल तो कई चीज़ों का रहेगा मगर

अब आपसे नाराज़ रहने को जी नहीं करता

फिर भी ​एक चीज़ के लिए ताउम्र नाराज़ रहूंगी 

की आप हमारे लिए कई सारी चीज़ें छोड़ गई

माँ, आपने वो चीज़ें खुद ही क्यों नहीं इस्तेमाल की?


Sapna...

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