Tuesday, February 7, 2023

उम्र..

जिन्होंने ज़्यादा ज़िन्दगी जी है,

उन्होंने ज़्यादा मौते भी देखी होंगी

शायद इसीलिए बढ़ती उम्र के साथ

मृत्यु की स्वीकृति बढ़ जाती है


पर मैंने कल्पना भी ना की थी

की मुझे जीवन देने वाले के 

जीवन का अंत मेरी आँखों के सामने होगा

मैं इसके लिए ना तब तैयार थी जब ये हो रहा था

ना मैं अब तैयार हूँ, जब ये हो चुका है!


मुझे उम्र के सफर में आगे नहीं पीछे जाना है

मुझे ना प्रौढ़ता चाहिए, ना जवानी, ना लड़कपन

मुझे अपना बचपन चाहिए


वही जहाँ मैं तुम्हारी गोद में सोया करती थी

वही जहाँ मैं तुम्हारे ध्यान के लिए रोया करती

वही जब तुम्हारे आँचल की छाव मिलती

वही जब मुझे देख तुम्हारी मुस्कान खिलती


अब जो चाहू पा सकती हूँ

पर तुम्हारा निश्छल प्यार कहा मिलेगा

इस चक्र को कोई पलट सके

तो बढ़ती उम्र को चकमा देके 

फिर से ५ बरस की हो जाऊ?...


Sapna..


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