मुझे हर रंग में माँ
तेरे रंग दिखाए देने लगे है
सुबह की धूप सी खिली खिली
तेरे मुस्कान का रंग पीला
हम बच्चों को डाटती फटकारती
गुस्से का तेरा रंग नीला
जब तू लेहेंगा पहन के सजती
तुझपर खिलती ओढ़नी लाल
जब पापा तुझे मिठाई खिलाते
तो शर्म से गुलाबी होते तेरे गाल
तेरे आशीष से फलता-फूलता
हरा - भरा सा तेरा परिवार
हमारे हर गलत को सही करता
सौम्य - शीतल सफ़ेद सा तेरा दुलार
अपने अंदर इंद्रधनुष का
हर रंग तुम बसाया करती हो
अपने रंगो के पिटारे में से
कुछ अपने अपनों के नाम करती हो
मुझे हर रंग में माँ
तेरे रंग दिखाए देने लगे है
उन सब रंगो को बटोरकर
एक - एक हिस्सा हम अपने पास रखने लगे है..
Sapna...
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