आपके बीना आइस क्रीम में ठंडक नहीं
मक्खन खाखरे में स्वाद नहीं
भुट्टे की चटनी तीखी नहीं
चाट में चटकारा नहीं
आपके बिना सिनेमा में मज़ा नहीं
मस्ती में मनोरंजन नहीं
शॉपिंग में ख़ुशी नहीं
गानों में अर्थ नहीं
आपके बिना शादियों में जशन नहीं
लहंगे में खूबसूरती नहीं
चूड़ियों में खनक नहीं
चश्मे में चमक नहीं
आपके बिना दिवाली की रौनक नहीं
नए साल की बधाई नहीं
माताजी का ठंडा नहीं
होली में रंग नहीं
आपके बिना बादाम का दूध नहीं
सर्दिओं की मिठाई नहीं
आम की गुठलियों का मज़ा नहीं
पकोड़ो भी करारे नहीं
आपके बिना बच्चों को लाड नहीं
पापा और हमको डाँट नहीं
भाई के साथ गोद की लड़ाई नहीं
माथे पर सुकून से सेहलाहट नहीं
आपके बिना गर्मी की छुट्टियां नहीं
रिसोर्ट का प्रोग्राम नहीं
रात भर जाग के बातें नहीं
घर पे डांस की पार्टी नहीं
आपके बिना फोटो में यादें नहीं
फ़ोन पर रोज़ के गप्पे नहीं
मिलने का इंतज़ार नहीं
कल की तैयारी नहीं
आपके बिना हम है तो सही
पर आपके बिना हम हम ही नहीं
घर तो वही है मगर
आपके बिना घर, घर ही नहीं..
Sapna..
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