Wednesday, February 22, 2023

तुम बिन...

तुम बिन जैसे

जड़ बिना वृक्ष

तुम बिन जैसे

वायु बिना सांसें

तुम बिन जैसे

आत्मा बिना शरीर

तुम बिन जैसे

दिशाहीन यात्रा


तुम्हारी कोशिशो के आगे

हमारी कोशिश बेकार लगती है

तुम्हारे मातृत्व के सामने

हमारी ममता असार लगती है


हर एक की, हर चीज़ का ख्याल

कैसे रख लेती थी?

अपने अपनों की खामियां

कितनी खूबसुरति से छुपा लेती थी

दुःख में खुद घिरी होकर भी

हम तक सिर्फ ख़ुशी पहुँचाती

माँ, तुम्हारी अजीब-ओ-गरीब तरक़ीबें

हमें तकलीफ से बचा लेती


सब कहते है, हिम्मत रखो

वक़्त के साथ सब ठीक हो जायेगा

उन नादानो को क्या समझाए

की ये परिवार अब एक सूखा कुआ है

इसमें ममता का मधुर जल

फिर कभी ना भर पायेगा..


ऐसा नहीं की हम प्रयत्न नहीं करते

बस उसमे पूरी जान नहीं लगा पाते

उसका एक हिस्सा तुम्हारे साथ विदा जो हो गया


अब तो आंसू भी इजाज़त नहीं लेते

बेबाक छलक जाते है

वो समझते है की अब

उन्हें बहने से रोकने वाला कौन?


खैर, फिर कही, किसी और जनम में 

आपसे फिर मुलाक़ात हो

ये प्रार्थना सुबह शाम करते है

रात ढली, दिन निकल गया

चलो, अपने अपने काम पर चलते है


Sapna..

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